Antariksha Darpan. the most fascinating blog. About planet, sattelite & cosmology. सबसे आकर्षक ब्लॉग. ग्रह, उपग्रह, और ब्रह्माण्ड विज्ञान के बारे में.

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बिकाऊ मीडिया -व हमारा भविष्य
Saturday, November 8, 2014
मध्यम दूरी मिसाइल अग्नि-2, परीक्षण सफल
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Wednesday, October 15, 2014
भारतीय नौवहन उपग्रह 'IRNSS 1सी' सफलतापूर्वक प्रक्षेपित
भारतीय नौवहन उपग्रह 'IRNSS 1सी' सफलतापूर्वक प्रक्षेपित भारत ने आज सफलतापूर्वक इसरो के पीएसएलवी सी 26 के द्वारा आईआरएनएसएस उपग्रह को प्रक्षेपित कर दिया। उपग्रह को पूर्व निर्धारित समयानुसार तड़के एक बजकर 32 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया। 'वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली' के
सात उपग्रहों की श्रृंखला में से तीसरा उपग्रह है। नौवहन स्वावलम्बन हेतु 4 उपग्रह आवश्यक हैं। इसकी विस्तृत जानकारी 3 दिन पूर्व 'उलटी गणना' http://antarikshadarpan.blogspot.in/2014/10/blog-post.html हम दे ही चुके है।
प्रक्षेपण का वीडिओ हमारे दूरदर्पण चैनल के अंतरिक्ष दर्पण 'playlist' से यहाँ संलग्न है-
https://www.youtube.com/watch?v=Oc-DCCwrNjU&index=21&list=PLD8A212A480412E57
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सात उपग्रहों की श्रृंखला में से तीसरा उपग्रह है। नौवहन स्वावलम्बन हेतु 4 उपग्रह आवश्यक हैं। इसकी विस्तृत जानकारी 3 दिन पूर्व 'उलटी गणना' http://antarikshadarpan.blogspot.in/2014/10/blog-post.html हम दे ही चुके है।
प्रक्षेपण का वीडिओ हमारे दूरदर्पण चैनल के अंतरिक्ष दर्पण 'playlist' से यहाँ संलग्न है-
https://www.youtube.com/watch?v=Oc-DCCwrNjU&index=21&list=PLD8A212A480412E57
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Monday, October 13, 2014
नौवहन के उपग्रह प्रक्षेपण की उल्टी गणना
नौवहन 'IRNSS' के उपग्रह के प्रक्षेपण की उल्टी गणना आरम्भ
भारत के नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस 1 सी के प्रक्षेपण की श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र में प्रात: छह बजकर 32 मिनट पर आज प्रात: छह बजकर 32 मिनट पर उल्टी गणना आरम्भ हो गई। यह अमेरिका के 'ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम' की भाँति 'वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली' के सात उपग्रहों की श्रृंखला में से तीसरा उपग्रह है। इसे पीएसएलवी सी 26 के माध्यम प्रक्षेपित किया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि प्रक्षेपण प्राधिकार बोर्ड (एलएबी) से रविवार को इस निमित्त स्वीकृति मिल चुकी है। https://www.youtube.com/watch?v=3LtlhrBeMmw&list=PLD8A212A480412E57&index=20
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अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए 67 घंटे की उल्टी गणना अबाध गति से जारी है। भारतीय समयानुसार 16 अक्तूबर को तड़के एक बजकर 32 मिनट पर उपग्रह का प्रक्षेपण निर्धारित है। पूर्व में इसे 10 अक्तूबर को प्रक्षेपित किया जाना था, किन्तु तकनीकी दोष के चलते इसे स्थगित कर दिया गया। प्रक्षेपण के समय 1,425 किलोग्राम भार वाले आईआरएनएसएस 1 सी को 'उप भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा' 'सब जीओसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट' (सब जीटीओ) में स्थापित किया जाएगा। अमेरिका के 'वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली' (GPS) की भांति ही क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली स्थापित करने की आकांक्षाओं के तहत, इसरो की योजना भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) में सात उपग्रह भेजने की है।
श्रृंखला के पहले दो उपग्रह आईआरएनएसएस 1ए और और आईआरएनएसएस 1 बी हैं, जो क्रमश: एक जुलाई 2013 और इस वर्ष चार अप्रैल को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किए गए थे। इसरो के अधिकारियों ने कहा कि आईआरएनएसएस के अभियान को आरम्भ करने के लिए सात उपग्रहों में से इसरो को कम से कम चार को प्रक्षेपित करने की आवश्यकता है। भारत द्वारा विकसित किया जा रहा आईआरएनएसएस देश में और क्षेत्र में सटीक स्थिति सूचना सेवा उपलब्ध कराएगा। इसका क्षेत्र इसकी सीमा रेखा से 1,500 किलोमीटर परे तक विस्तारित होगा, जो प्राथमिक सेवा क्षेत्र है। आईआरएनएसएस अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, रूस के ग्लोनास और यूरोप के गैलिलियो की भांति ही है। चीन और जापान के पास भी इसी तरह की प्रणाली ‘बेईदू’ और ‘कासी जेनिथ’ हैं। Antariksha Darpan. the most fascinating blog. About planet, sattelite & cosmology.
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Thursday, September 25, 2014
मंगल परिक्रमा मिशन: ग्रह के प्रथम चित्र
मंगल परिक्रमा मिशन: ग्रह के प्रथम चित्र
भारत के मंगल परिक्रमा मिशन (मंपमि/एमओएम) ने पहले ही प्रयास में लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित होने का नया इतिहास रचने के दूसरे दिन आज मंगल ग्रह के प्रथम चित्र भेजे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने लाल ग्रह के चित्रों के साथ ट्विट किया, ''मंगल के प्रथम चित्र, 7300 किलोमीटर की ऊंचाई से ...वहां का दृश्य सुंदर है।’’ अंतरिक्ष यान ‘‘मंगलयान’’ इस समय कक्षा में मंगल ग्रह का चक्कर लगा रहा है और मंगल ग्रह से इसकी न्यूनतम दूरी 421.7 किलोमीटर है तथा अधिकतम दूरी 76,993.6 किलोमीटर है। इसरो ने यह जानकारी दी।
कक्षा का झुकाव मंगल ग्रह की भूमध्यवर्ती क्षेत्र में 150 डिग्री के वांछित स्तर पर है। इस कक्षा में मंगलयान को मंगल ग्रह का एक चक्कर लगाने में 72 घंटे, 51 मिनट और 51 सेकेंड का समय लगता है। इसरो की विज्ञप्ति के अनुसार आने वाले सप्ताहों में मंगलयान के पांच वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करते हुए अंतरिक्ष यान का मंगल ग्रह की कक्षा में पूरा परीक्षण किया जाएगा। इसे भी देखें -
युदस: विश्व गुरु सार्थक हुआ, भारत के वैज्ञानिकों ने इतिहास रचा, युग दर्पण ने चोपाई की नई व्याख्या: मंगल भुवन अमंगल हारी अर्थात जो मंगल करता है वे मंगल की कृपा पाने में प्रथम बार में सफल हुए, जो अमंगल करता थे, वो हारते रहे।
मंपमि .... प्रक्षेपित किया गया था। यह एक दिसंबर को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर गया था।
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भारत का मंगलकार्य सफल
भारत का मंगलकार्य सफल
अंतरिक्ष यात्रा 10 माह विडिओ में दर्शाया गया :-
https://www.youtube.com/watch?v=lMmyEJiOB-8&index=17&list=PLD8A212A480412E57
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग। ....
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग। ....
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Tuesday, September 23, 2014
भारत का मंगलकार्य सफल
भारत का मंगलकार्य सफल
अंतरिक्ष यात्रा 10 माह विडिओ में दर्शाया गया :-
https://www.youtube.com/watch?v=lMmyEJiOB-8&index=17&list=PLD8A212A480412E57
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग।
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग।
यह स्थिति पूर्णतया ‘‘इस पार या उस पार’’ वाली थी, क्योंकि समस्त कौशल के बाद भी एक तुच्छ सी भूल ऑर्बिटर को अंतरिक्ष की गहराइयों में धकेल सकती थी। यान की पूर्ण कौशल युक्त प्रक्रिया, मंगल के पीछे हुई; जैसा कि पृथ्वी से देखा गया। इसका अर्थ यह था कि मंगल परिक्रमा प्रवेश प्रज्ज्वलन में लगे, 4 मिनट के समय से लेकर प्रक्रिया के निर्धारित समय पर समापन के तीन मिनट बाद तक, पृथ्वी पर उपस्थित वैज्ञानिक दल यान की प्रगति नहीं देख पाए। ऑर्बिटर अपने उपकरणों के साथ कम से कम 6 माह तक दीर्घ वृत्ताकार पथ पर घूमता रहेगा और उपकरण एकत्र आंकड़े पृथ्वी पर भेजते रहेंगे। मंगल की कक्षा में यान को सफलतापूर्वक पहुंचाने के बाद भारत लाल ग्रह की कक्षा या सतह पर यान भेजने वाला चौथा देश बन गया है। अब तक यह उपलब्धि अमेरिका, यूरोप और रूस को मिली थी। कुल 450 करोड़़ रुपये की लागत वाले मंगल यान का उद्देश्य लाल ग्रह की सतह तथा उसके खनिज अवयवों का अध्ययन करना तथा उसके वातावरण में मीथेन गैस की खोज करना है। पृथ्वी पर जीवन के लिए मीथेन एक महत्वपूर्ण रसायन है। इस अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण 5 नवंबर 2013 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से स्वदेश निर्मित पीएसएलवी रॉकेट से किया गया था। यह 1 दिसंबर 2013 को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण से बाहर निकल गया था।
https://www.youtube.com/watch?v=jwHBMR8C6B0&index=87&list=PLDB2CD0863341092A
भारत का एमओएम न्यूनतम लागत वाला अंतरग्रही मिशन है। नासा का मंगल यान मावेन 22 सितंबर को मंगल की कक्षा में प्रविष्ट हुआ था। भारत के एमओएम की कुल लागत मावेन की लागत का मात्र दसवां अंश है। कुल 1,350 किग्रा भार वाले अंतरिक्ष यान में पांच उपकरण लगे हैं। इन उपकरणों में एक संवेदक (सेंसर), एक रंगीन कैमरा और एक 'ताप छायांकन वर्ण-पट यंत्र' थर्मल इमैजिंग स्पेक्ट्रोमीटर शामिल है। संवेदक लाल ग्रह पर जीवन के संभावित संकेत मीथेन अर्थात मार्श गैस का पता लगाएगा। रंगीन कैमरा और 'ताप छायांकन वर्ण-पट यंत्र' लाल ग्रह की सतह का तथा उसमें उपलब्ध खनिज संपदा का अध्ययन कर आंकड़े जुटाएंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने बताया कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और मावेन की टीम ने भारतीय यान के मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचने के लिए इसरो को बधाई दी है।
मंपमि 450 करोड़ रूपये की लागत वाला सबसे अल्प व्ययी अंतर ग्रहीय मिशन था और भारत इसके साथ ही विश्व में पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में अंतरिक्ष यान स्थापित करने वाला एकमात्र राष्ट्र बन गया है। जबकि यूरोपीय संघ, अमेरिकी और रूसी यान को इसके लिए कई बार प्रयास करने पड़े। मंगलयान कम से कम आगामी छह माह तक दीर्घवर्त्ताकार रूप में मंगल के चक्कर लगाएगा और अपने उपकरणों का उपयोग करते हुए पृथ्वी पर चित्र भेजेगा। मंगलयान को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में गत वर्ष पांच नवंबर को पीएसएलवी राकेट के माध्यम प्रक्षेपित किया गया था। तथा यह एक दिसंबर को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर गया था।
मंपमि 450 करोड़ रूपये की लागत वाला सबसे अल्प व्ययी अंतर ग्रहीय मिशन था और भारत इसके साथ ही विश्व में पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में अंतरिक्ष यान स्थापित करने वाला एकमात्र राष्ट्र बन गया है। जबकि यूरोपीय संघ, अमेरिकी और रूसी यान को इसके लिए कई बार प्रयास करने पड़े। मंगलयान कम से कम आगामी छह माह तक दीर्घवर्त्ताकार रूप में मंगल के चक्कर लगाएगा और अपने उपकरणों का उपयोग करते हुए पृथ्वी पर चित्र भेजेगा। मंगलयान को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में गत वर्ष पांच नवंबर को पीएसएलवी राकेट के माध्यम प्रक्षेपित किया गया था। तथा यह एक दिसंबर को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर गया था।
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Sunday, August 17, 2014
जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनायें !
जय श्री कृष्ण,
अखिल विश्व में फैले समस्त सनातन भक्तों को (एकमात्र 16 कला सम्पूर्ण अवतार) श्री कृष्ण जन्माष्टमी की कोटि कोटि बधाई और हार्दिक मंगलकामनायें !
रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे श्री कृष्ण का अवतरण होगा, और शीघ्र ही कंस व जरासंध का नाश होगा। अत्याचारी अधर्मी कंस उ प्र पर सत्तासीन तथा उसके शर्मनिरपेक्ष समर्थक संरक्षक जरासंध।
यहाँ से इडोनेसिया तक, जिनका इमान मूसल है वो मुसल मान हो कर भी, श्रद्धा अहिंसा व भारत भक्त सब जीवों के प्रति दयावान हों, हिंदू ही हैं। सांप्रदायिक यह नहीं, जिहादी सोच है।नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
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रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे श्री कृष्ण का अवतरण होगा, और शीघ्र ही कंस व जरासंध का नाश होगा। अत्याचारी अधर्मी कंस उ प्र पर सत्तासीन तथा उसके शर्मनिरपेक्ष समर्थक संरक्षक जरासंध।
यहाँ से इडोनेसिया तक, जिनका इमान मूसल है वो मुसल मान हो कर भी, श्रद्धा अहिंसा व भारत भक्त सब जीवों के प्रति दयावान हों, हिंदू ही हैं। सांप्रदायिक यह नहीं, जिहादी सोच है।नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
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Friday, August 1, 2014
मंगल अभियान
मंगल अभियान
मंगल कक्षित्र अभियान भारत का प्रथम अंतरग्रहीय अभियान है। मंगल अभियान के उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं:
1. 1350 कि.ग्रा. द्रव्यमान के एक मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान का निर्माण।
2. भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट, पी एस एल वी – एक्स एल द्वारा मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण।
3. पृथ्वी की कक्षा से 300 दिनों की यात्रा के बाद सितंबर, 2014 तक अंतरिक्षयान को मंगल ग्रह के आसपास 366 कि.मी. x 80,000 कि.मी. की दीर्घवृत्ताकार कक्षा में स्थापित करना।
मंगल ग्रह के आसपास अंतरिक्षयान की कक्षीय कालावधि के मध्य अंतरिक्षयान में रखे वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करते हुए मंगल सतह के गुणों, आकृतिविज्ञान, खनिजविज्ञान और मंगल के वातावरण का अध्ययन करना।
मंगल अभियान की कुल लागत रु. 450 करोड़ है, जिसमें मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान, प्रमोचक राकेट और भू-खंड के निर्माण पर आई लागत भी शामिल है।
वत समय, मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान मंगल ग्रह की ओर अपने पथ पर आगे बढ़ रहा है। 24 सितंबर, 2014 को अंतरिक्षयान के अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने की संभावना है। मंगल कक्षित्र अभियान से देश की प्रौद्योगिकी की उन्नयन संभव होगा। यह देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए ग्रहीय अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा। यह युवा मस्तिष्क में राष्ट्रीय गौरव तथा उत्तेजना का सृजन करेगा।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। (31.7.14, 31-जुलाई, 2014)
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1. 1350 कि.ग्रा. द्रव्यमान के एक मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान का निर्माण।
2. भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट, पी एस एल वी – एक्स एल द्वारा मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण।
3. पृथ्वी की कक्षा से 300 दिनों की यात्रा के बाद सितंबर, 2014 तक अंतरिक्षयान को मंगल ग्रह के आसपास 366 कि.मी. x 80,000 कि.मी. की दीर्घवृत्ताकार कक्षा में स्थापित करना।
मंगल ग्रह के आसपास अंतरिक्षयान की कक्षीय कालावधि के मध्य अंतरिक्षयान में रखे वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करते हुए मंगल सतह के गुणों, आकृतिविज्ञान, खनिजविज्ञान और मंगल के वातावरण का अध्ययन करना।
मंगल अभियान की कुल लागत रु. 450 करोड़ है, जिसमें मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान, प्रमोचक राकेट और भू-खंड के निर्माण पर आई लागत भी शामिल है।
वत समय, मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान मंगल ग्रह की ओर अपने पथ पर आगे बढ़ रहा है। 24 सितंबर, 2014 को अंतरिक्षयान के अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने की संभावना है। मंगल कक्षित्र अभियान से देश की प्रौद्योगिकी की उन्नयन संभव होगा। यह देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए ग्रहीय अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा। यह युवा मस्तिष्क में राष्ट्रीय गौरव तथा उत्तेजना का सृजन करेगा।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। (31.7.14, 31-जुलाई, 2014)
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