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Thursday, September 25, 2014

मंगल परिक्रमा मिशन: ग्रह के प्रथम चित्र

मंगल परिक्रमा मिशन: ग्रह के प्रथम चित्र
मंगल से मंगलयान ने भेजी भारत के लिए पहली तस्‍वीर भारत के मंगल परिक्रमा मिशन (मंपमि/एमओएम) ने पहले ही प्रयास में लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित होने का नया इतिहास रचने के दूसरे दिन आज मंगल ग्रह के प्रथम चित्र भेजे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने लाल ग्रह के चित्रों के साथ ट्विट किया, ''मंगल के प्रथम चित्र, 7300 किलोमीटर की ऊंचाई से ...वहां का दृश्य सुंदर है।’’ अंतरिक्ष यान ‘‘मंगलयान’’ इस समय कक्षा में मंगल ग्रह का चक्कर लगा रहा है और मंगल ग्रह से इसकी न्यूनतम दूरी 421.7 किलोमीटर है तथा अधिकतम दूरी 76,993.6 किलोमीटर है। इसरो ने यह जानकारी दी।
भारत के मार्स ओर्बिटर मिशन ने लाल ग्रह मंगल की पहली तस्वीरें भेजींकक्षा का झुकाव मंगल ग्रह की भूमध्यवर्ती क्षेत्र में 150 डिग्री के वांछित स्तर पर है। इस कक्षा में मंगलयान को मंगल ग्रह का एक चक्कर लगाने में 72 घंटे, 51 मिनट और 51 सेकेंड का समय लगता है। इसरो की विज्ञप्ति के अनुसार आने वाले सप्ताहों में मंगलयान के पांच वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करते हुए अंतरिक्ष यान का मंगल ग्रह की कक्षा में पूरा परीक्षण किया जाएगा। इसे भी देखें -

भारत का मंगलकार्य सफल

भारत का मंगलकार्य सफल 
युदस: विश्व गुरु सार्थक हुआ, भारत के वैज्ञानिकों ने इतिहास रचा, युग दर्पण ने चोपाई की नई व्याख्या: मंगल भुवन अमंगल हारी अर्थात जो मंगल करता है वे मंगल की कृपा पाने में प्रथम बार में सफल हुए, जो अमंगल करता थे, वो हारते रहे।
अंतरिक्ष यात्रा 10 माह विडिओ में दर्शाया गया :-
https://www.youtube.com/watch?v=lMmyEJiOB-8&index=17&list=PLD8A212A480412E57
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग। .... 
मंपमि .... प्रक्षेपित किया गया था। यह एक दिसंबर को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर गया था।
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सबसे आकर्षक ब्लॉग. ग्रह, उपग्रह, और ब्रह्माण्ड विज्ञान के बारे में.

Tuesday, September 23, 2014

भारत का मंगलकार्य सफल

भारत का मंगलकार्य सफल 
युदस: विश्व गुरु सार्थक हुआ, भारत के वैज्ञानिकों ने इतिहास रचा, युग दर्पण ने चोपाई की नई व्याख्या: मंगल भुवन अमंगल हारी अर्थात जो मंगल करता है वे मंगल की कृपा पाने में प्रथम बार में सफल हुए, जो अमंगल करता थे, वो हारते रहे।
अंतरिक्ष यात्रा 10 माह विडिओ में दर्शाया गया :-
https://www.youtube.com/watch?v=lMmyEJiOB-8&index=17&list=PLD8A212A480412E57
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग। 
ट्रांस मंगल ग्रह इंजेक्शन (टीएमआई), 1 दिसंबर, 2013 को 0:49 बजे (आईएसटी) पर आरम्भ होकर, अंतरिक्ष यान बाहर मंगल ग्रह स्थानांतरण प्रक्षेपवक्र (MTT) में ले जाया गया। टीएमआई के साथ अंतरिक्ष यान के पृथ्वी की परिक्रमा का चरण समाप्त हो गया है और अंतरिक्ष यान सूर्य के चारों ओर लगभग 9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा के पश्चात् मंगल ग्रह की परिधि में अब सतह पर है 
Trans Mars Injection (TMI), carried out on Dec 01, 2013 at 00:49 hrs (IST) has moved the spacecraft in the Mars Transfer Trajectory (MTT).With TMI the Earth orbiting phase of the spacecraft ended and the spacecraft is now on a course to encounter Mars after a journey of about 10 months around the Sun 
समस्त विवरण भारत ने आज अपना अंतरिक्षयान मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि अर्जित करने के बाद भारत विश्व में प्रथम ऐसा देश बन गया, जिसने अपने प्रथम प्रयास में ही ऐसे अंतरग्रही अभियान में सफलता प्राप्त की है। प्रात: 7 बज कर 17 मिनट पर 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम), यान को मंगल की कक्षा में प्रविष्ट कराने वाले उत्प्रेरक के साथ तेजी से सक्रिय हुयी, जिससे मंगल परिक्रमा (ऑर्बिटर) मिशन (एमओएम) यान की गति इतनी धीमी हो जाए, कि लाल ग्रह उसे खींच ले। मिशन की सफलता की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ‘‘एमओएम का मंगल से मिलन।’’
विश्व गुरु सार्थक हुआएक ओर मंगल मिशन इतिहास के पृष्ठों में स्वयं को स्वर्ण अक्षरों में अंकित करा रहा था, वहीं दूसरी ओर यहां स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नियंत्रण केंद्र में अंतिम पल अति व्याकुलता भरे थे। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के साथ मंगल मिशन की सफलता के साक्षी बने, मोदी ने कहा ‘‘विषमताएं हमारे साथ रहीं और मंगल के 51 मिशनों में से 21 मिशन ही सफल हुए हैं,’’ किन्तु ‘‘हम सफल रहे।’’ प्रसन्नता से फूले नहीं समा रहे प्रधानमंत्री ने, इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन की पीठ थपथपाई और अंतरिक्ष की यह महती उपलब्धि अर्जित कर इतिहास रचने के लिए, भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को बधाई दी। ‘‘मंगलयान’’ की सफलता के साथ ही भारत प्रथम प्रयास में मंगल पर जाने वाला 'विश्व का प्रथम देश' बन गया है। यूरोपीय, अमेरिकी और रूसी यान लाल ग्रह की कक्षा में या तल पर पहुंचे हैं किन्तु कई प्रयासों के बाद।
मंगल यान को लाल ग्रह की कक्षा खींच सके, इसके लिए यान की गति 22.1 किमी प्रति सेकंड से घटा कर 4.4 किमी प्रति सेकंड की गई और फिर यान में डाले गए निर्देश (कमांड) द्वारा मंगल परिक्रमा प्रवेश ‘‘मार्स ऑर्बिटर इन्सर्शन’’ (एमओई) की प्रक्रिया संपन्न हुई। यह यान सोमवार को मंगल के अतिनिकट पहुंच गया था। जिस समय एमओएम कक्षा में प्रविष्ट हुआ, पृथ्वी तक इसके संकेतों को पहुंचने में प्राय: 12 मिनट 28 सेकंड का समय लगा। ये संकेत नासा के कैनबरा और गोल्डस्टोन स्थित गहन अंतरिक्ष संजाल (डीप स्पेस नेटवर्क) स्टेशनों ने ग्रहण किये और आंकड़े वास्तविक समय (रीयल टाइम) पर यहां इसरो स्टेशन भेजे गए। अंतिम पलों में सफलता का प्रथम संकेत तब मिला, जब इसरो ने घोषणा की कि भारतीय मंगल परिक्रमा (ऑर्बिटर) के इंजनों के प्रज्ज्वलन की पुष्टि हो गई है। इतिहास रचे जाने का संकेत देते हुए इसरो ने कहा ‘‘मंगल ऑर्बिटर के सभी इंजन शक्तिशाली हो रहे हैं। प्रज्ज्वलन की पुष्टि हो गई है।’’ मुख्य इंजन का प्रज्ज्वलित होना महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह प्राय: 300 दिन से निष्क्रिय था और सोमवार को मात्र 4 सेकेंड के लिए सक्रिय हुआ था।
यह स्थिति पूर्णतया ‘‘इस पार या उस पार’’ वाली थी, क्योंकि समस्त कौशल के बाद भी एक तुच्छ सी भूल ऑर्बिटर को अंतरिक्ष की गहराइयों में धकेल सकती थी। यान की पूर्ण कौशल युक्त प्रक्रिया, मंगल के पीछे हुई; जैसा कि पृथ्वी से देखा गया। इसका अर्थ यह था कि मंगल परिक्रमा प्रवेश प्रज्ज्वलन में लगे, 4 मिनट के समय से लेकर प्रक्रिया के निर्धारित समय पर समापन के तीन मिनट बाद तक, पृथ्वी पर उपस्थित वैज्ञानिक दल यान की प्रगति नहीं देख पाए। ऑर्बिटर अपने उपकरणों के साथ कम से कम 6 माह तक दीर्घ वृत्ताकार पथ पर घूमता रहेगा और उपकरण एकत्र आंकड़े पृथ्वी पर भेजते रहेंगे। मंगल की कक्षा में यान को सफलतापूर्वक पहुंचाने के बाद भारत लाल ग्रह की कक्षा या सतह पर यान भेजने वाला चौथा देश बन गया है। अब तक यह उपलब्धि अमेरिका, यूरोप और रूस को मिली थी। कुल 450 करोड़़ रुपये की लागत वाले मंगल यान का उद्देश्य लाल ग्रह की सतह तथा उसके खनिज अवयवों का अध्ययन करना तथा उसके वातावरण में मीथेन गैस की खोज करना है। पृथ्वी पर जीवन के लिए मीथेन एक महत्वपूर्ण रसायन है। इस अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण 5 नवंबर 2013 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से स्वदेश निर्मित पीएसएलवी रॉकेट से किया गया था। यह 1 दिसंबर 2013 को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण से बाहर निकल गया था।
https://www.youtube.com/watch?v=jwHBMR8C6B0&index=87&list=PLDB2CD0863341092A
भारत का एमओएम न्यूनतम लागत वाला अंतरग्रही मिशन है। नासा का मंगल यान मावेन 22 सितंबर को मंगल की कक्षा में प्रविष्ट हुआ था। भारत के एमओएम की कुल लागत मावेन की लागत का मात्र दसवां अंश है। कुल 1,350 किग्रा भार वाले अंतरिक्ष यान में पांच उपकरण लगे हैं। इन उपकरणों में एक संवेदक (सेंसर), एक रंगीन कैमरा और एक 'ताप छायांकन वर्ण-पट यंत्र' थर्मल इमैजिंग स्पेक्ट्रोमीटर शामिल है। संवेदक लाल ग्रह पर जीवन के संभावित संकेत मीथेन अर्थात मार्श गैस का पता लगाएगा। रंगीन कैमरा और 'ताप छायांकन वर्ण-पट यंत्र' लाल ग्रह की सतह का तथा उसमें उपलब्ध खनिज संपदा का अध्ययन कर आंकड़े जुटाएंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने बताया कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और मावेन की टीम ने भारतीय यान के मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचने के लिए इसरो को बधाई दी है।
मंपमि 450 करोड़ रूपये की लागत वाला सबसे अल्प व्ययी अंतर ग्रहीय मिशन था और भारत इसके साथ ही विश्व में पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में अंतरिक्ष यान स्थापित करने वाला एकमात्र राष्ट्र बन गया है। जबकि यूरोपीय संघ, अमेरिकी और रूसी यान को इसके लिए कई बार प्रयास करने पड़े। मंगलयान कम से कम आगामी छह माह तक दीर्घवर्त्ताकार रूप में मंगल के चक्कर लगाएगा और अपने उपकरणों का उपयोग करते हुए पृथ्वी पर चित्र भेजेगा। मंगलयान को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में गत वर्ष पांच नवंबर को पीएसएलवी राकेट के माध्यम प्रक्षेपित किया गया था। तथा यह एक दिसंबर को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर गया था।
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Sunday, August 17, 2014

जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनायें !

जय श्री कृष्ण, 
अखिल विश्व में फैले समस्त सनातन भक्तों को (एकमात्र 16 कला सम्पूर्ण अवतार) श्री कृष्ण जन्माष्टमी की कोटि कोटि बधाई और हार्दिक मंगलकामनायें !
रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे श्री कृष्ण का अवतरण होगा,  और शीघ्र ही कंस व जरासंध का नाश होगा। अत्याचारी अधर्मी कंस उ प्र पर सत्तासीन तथा उसके शर्मनिरपेक्ष समर्थक संरक्षक जरासंध। 

यहाँ से इडोनेसिया तक, जिनका इमान मूसल है वो मुसल मान हो कर भी, श्रद्धा अहिंसा व भारत भक्त सब जीवों के प्रति दयावान हों, हिंदू ही हैं। सांप्रदायिक यह नहीं, जिहादी सोच है।नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
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Friday, August 1, 2014

मंगल अभियान

मंगल अभियान 
मंगल कक्षित्र अभियान भारत का प्रथम अंतरग्रहीय अभियान है। मंगल अभियान के उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: 
1. 1350 कि.ग्रा. द्रव्यमान के एक मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान का निर्माण। 
2. भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट, पी एस एल वी – एक्स एल द्वारा मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण। 
3. पृथ्वी की कक्षा से 300 दिनों की यात्रा के बाद सितंबर, 2014 तक अंतरिक्षयान को मंगल ग्रह के आसपास 366 कि.मी. x 80,000 कि.मी. की दीर्घवृत्ताकार कक्षा में स्थापित करना। 
मंगल ग्रह के आसपास अंतरिक्षयान की कक्षीय कालावधि के मध्य अंतरिक्षयान में रखे वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करते हुए मंगल सतह के गुणों, आकृतिविज्ञान, खनिजविज्ञान और मंगल के वातावरण का अध्ययन करना। 
मंगल अभियान की कुल लागत रु. 450 करोड़ है, जिसमें मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान, प्रमोचक राकेट और भू-खंड के निर्माण पर आई लागत भी शामिल है। 
वत समय, मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान मंगल ग्रह की ओर अपने पथ पर आगे बढ़ रहा है। 24 सितंबर, 2014 को अंतरिक्षयान के अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने की संभावना है। मंगल कक्षित्र अभियान से देश की प्रौद्योगिकी की उन्नयन संभव होगा। यह देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए ग्रहीय अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा। यह युवा मस्तिष्क में राष्ट्रीय गौरव तथा उत्तेजना का सृजन करेगा।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। (31.7.14, 31-जुलाई, 2014)
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Wednesday, July 23, 2014

मंगल अंतरिक्ष यान की 80% यात्रा पूर्ण

मंगल अंतरिक्ष यान की 80% यात्रा पूर्ण 
22 जुलाई 2014 मंगल ग्रह के और समीप पहुंचते हुए भारत के महात्वकांक्षी अंतरिक्ष यान ने प्राय:80% यात्रा  पूर्ण कर ली है। उसके मंगल तक पहुंचने के लिए निर्धारित समयसीमा 24 सितम्बर की है। भारतीय अंतिरक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज अपनी सोशल नेटवर्किंग साइट पर बताया कि अंतरिक्षयान ने मंगल ग्रह की अपनी अब तक की यात्रा में 80% प्राय:, 54 करोड़ किलोमीटर से अधिक की दूरी पार कर ली है और इसके अंतरिक्ष उपकरण अच्छी स्थिति में हैं।’’
अंतरिक्ष एजेंसी ने गत 11 जून को अंतरिक्षयान में उपकरण संबंधी दूसरा सुधार किया था। अंतरिक्षयान को उसकी यात्रा के क्रम में बनाए रखने के लिए बीच यात्रा में समय समय पर तकनीकी गड़बड़ियों को दूर किया जाता है। आगामी अगस्त में भी एक और सुधार किया जाएगा। प्राय: 450 करोड़ रूपये लागत वाले इस मंगल मिशन का प्रक्षेपण गत वर्ष पांच नवंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से किया गया था। इस मिशन का उद्देश्य वैज्ञानिक समुदाय को मंगल ग्रह के बारे उत्तम ढंग से अनुसंधान करने का अवसर प्रदान करना है।
नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प
-युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
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Monday, June 30, 2014

भारत की नई उड़ान (पीएसएलवी) सी-23 प्रक्षेपण

पीएसएलवी सी-23 सफलतापूर्वक प्रक्षेपण, भारत की नई उड़ान, गौरव का क्षण: मोदी

पीएसएलवी सी-23 सफलतापूर्वक लॉन्च, PM मोदी ने कहा- गौरव का क्षणश्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) : भारत ने सोमवार को पीएसएलवी-सी23 राकेट द्वारा 4 देशों के 5 उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया और ये उपग्रह कक्षा में स्थापित हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को देश की अंतरिक्ष क्षमता की ‘अभिपुष्टि’ करार दिया है। यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में प्रथम प्रक्षेपण पैड से प्रात:9 बज कर 52 मिनट पर रॉकेट को छोड़ा गया। मोदी इस महत्वपूर्ण क्षण के साक्षी बने। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी23 ने सभी 5 उपग्रहों को, प्रक्षेपण के 17 से 19 मिनटों के भीतर एक-एक करके, उन कक्षाओं में स्थापित कर दिया, जहां इन्हें भेजे जाने का लक्ष्य रखा गया था। भारत की नई उड़ान (पीएसएलवी) सी-23 प्रक्षेपण http://www.youtube.com/watch?v=HOL1SGFdO4k&list=PLD8A212A480412E57&feature=share&index=12
प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) सी-23 के सफलतापूर्वक प्रक्षेपण के लिए देश को बधाई देते हुए कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष क्षमता को 'वैश्विक मान्यता' है। इस रॉकेट ने 5 विदेशी उपग्रहों को अपने साथ लेकर उड़ान भरी है। मोदी ने इस रॉकेट के सफलतापूर्वक प्रक्षेपण की बधाई देते हुए कहा कि सभी को बधाई। मैं इस अवसर का साक्षी बनकर गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत की अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक मान्यता करार दिया।

प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारा मंगल अभियान 'हॉलीवुड फिल्म  ग्रैविटी' से सस्ता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारा कार्यक्रम स्वदेशी है। वैज्ञानिकों की पीढियों ने भारत को आत्मनिर्भर अंतरिक्ष शक्ति बनाने के लिए बहुत कार्य किया। 
इसरो/ भारत की नई उड़ान, 5 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण 
मिशन तैयारी समीक्षा समिति और प्रक्षेपण बोर्ड ने गत शुक्रवार को ही इस प्रक्षेपण को स्वीकृति दे दी थी, किन्तु आज पूर्व निर्धारित समय में फिर परिवर्तन किया गया और इसका प्रक्षेपण 3 मिनट विलम्ब से प्रात:9:52 बजे हुआ। यह विलंब रॉकेट के मार्ग में ‘संभवत: अंतरिक्ष के मलबों’ के आने के कारण हुआ। पीएसएलवी-सी23 जिन 5 उपग्रहों को अपने साथ ले गया, उनमें फ्रांस का 714 किलोग्राम का भू अवलोकन उपग्रह स्पोत-7 प्रमुख है। इसके अतिरिक्त जर्मनी के 14 किलोग्राम के ‘एसैट’, कनाडा के एनएलएस7.1 (कैन-एक्स4) और एनएलएस7.2 (कैन-एक्स4) तथा सिंगापुर के उपग्रह वेलोक्स-1 को प्रक्षेपित किया गया है। कनाडा के दोनों उपग्रह 15-15 किलोग्राम और सिंगापुर का उपग्रह 7 किलोग्राम का है। अंतरिक्ष स्थल का पहला अधिकारिक भ्रमण करने वाले मोदी ने अंतरक्षि समुदाय से कहा कि वह एक दक्षेस उपग्रह का विकास करें। इसके साथ ही उन्होंने वैज्ञानिकों के पहले के योगदानों का स्मरण करते हुए उनकी जमकर प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने उन चित्रों का उल्लेख किया जिनमें रॉकेट की सामग्री को साइकिलों पर रखकर लाते-लेजाते दिखाया गया है। अति प्रसन्न दिख रहे मोदी ने कहा कि इस प्रक्षेपण का साक्षी बनना सम्मान की बात है तथा उन्होंने इस सफल प्रक्षेपण के लिए ‘प्रतिभाशाली अंतरिक्ष वैज्ञानिकों’ को बधाई दी।
मोदी ने मिशन कंट्रोल रूप से कहा, ‘प्रक्षेपण हर भारतीय को आनंदित और गौरवान्वित किया है और मैं आपके चेहरे पर दिख रही प्रसन्नता को देख सकता हूं।’ उन्होंने कहा कि विदेशी उपग्रहों का यह सफल प्रक्षेपण ‘भारत की अंतरिक्ष क्षमता की वैश्विक अभिपुष्टि’ है। इस अवसर पर मोदी के अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन तथा केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू उपस्थित थे। प्रधानमंत्री श्रीहरिकोटा में इस प्रक्षेपण का साक्षी बनने के लिए रविवार को चेन्नई पहुंचे थे। यह स्थान चेन्नई से प्राय: 100 किलोमीटर कर दूरी पर है।
फ्रांसीसी उपग्रह स्पोत-7 को स्पोत-6 उपग्रह के बिल्कुल विपरीत दिशा में स्थापित किया जाना है। स्पोत-6 को इसरो ने 2012 में प्रक्षेपित किया था। यूरोपीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी ‘एयरबस डिफेंस एंड स्पेस’ ने स्पोत-7 का निर्माण किया है। जर्मनी का एसैट उपग्रह वैश्विक समुद्रीय यातायात निगरानी व्यवस्था पर केंद्रित होगा। यह जर्मनी का प्रथम डीएलआर उपग्रह है।
कनाडा के दोनों उपग्रहों एनएलएस 7.1 और एनएलएस 7.2 को टोरंटो विश्वविद्यालय ओर अंतरिक्ष अध्ययन-अंतरिक्ष उड़ान प्रयोगशाला संस्थान ने विकसित किया है। सिंगापुर के 'नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी' की ओर से विकसित उपग्रह 'वेलोक्स-1 इमेज सेंसर' के आंतरिक डिजाइन के लिए प्रौद्योगिकी का प्रदर्शक है। इन 5 उपग्रहों का प्रक्षेपण इसरो की व्यावसायिक इकाई 'एंट्रिक्स' के इन देशों के साथ किए गए व्यावसायिक प्रबंधों के तहत किया गया है। 
(पीएसएलवी) सी-23 की विशेषता 
इस उपग्रह को पृथ्वी की निगरानी के लिए तैयार किया गया है। जर्मनी के उपग्रह AISAT का उपयोग उच्च यातायात क्षेत्र 'हाई ट्रैफिक जोन' में 'सिग्नल व्यवस्था' को उत्तम बनाने के लिए किया जाएगा। कनाडा के 2 छोटे उपग्रहों NLS7.1 और NLS7.2 का उपयोग उप नगरीय क्षेत्र में जीपीएस तंत्र को उत्तम बनाने के लिए किया जाएगा। सिंगापुर के उपग्रह VELOX-1 को 'इमेज सेंसर' के रूप में 'डिजाइन' किया गया है।
इसरो की सफलता यात्रा 
इसरो ने अब तक 19 देशों के 35 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है जिससे देश के पास काफी विदेशी मुद्रा आई है। ये देश अल्जीरिया, अर्जेंटीना, आस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इस्राइल, इटली, जापान, कोरिया, लक्जमबर्ग, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, तुर्की और ब्रिटेन हैं।
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Saturday, May 31, 2014

इस समूह के पाठकों की सूचनार्थ:

इस समूह के पाठकों की सूचनार्थ:
सत्ता परिवर्तन हुआ व्यवस्था व परिवर्तन अभी शेष है केवल मार्ग खुला। शर्म निरपेक्ष लुटेरी सरकार के जाने से परिवर्तन की राह खुली। विकासोन्मुखी, नई सरकार से सहकार तथा समाज और सरकार के बीच तारतम्य बैठने की दृष्टी से, अपने भी कुछ ब्लॉग के नाम, विषय व आकारपट्ट, शीघ्र ही संशोधित किये जा रहे हैं। तथा एक नया 30 वां ब्लॉग 'विकास दर्पण' आरम्भ किया जा रहा है। 
युग दर्पण समाचार पत्र में भी आगामी अंक से सभी मंत्रालयों के समाचारों के लिए अतिरिक्त पृष्ठ 'विकास दर्पण' आरम्भ किये जा रहे हैं।
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